जीव हत्या पाप
जीव हत्या करना और मांस खाना अल्लाह का आदेश नहीं है
हत्या एक ऐसा शब्द है जिसको सुनकर अल्लाह से डरने वाले कि रूह कांप जाती है और उसी अल्लाह के नाम पर एक ही दिन में बकरीद के नाम पर लाखों जीवों की हत्या महामूर्खता है,महापाप है।
कुरान शरीफ सुरा-अल-बकरा आयत 22 में कहा है:-
मानव धरती पर रहने वाले सभी जीवों पर अधिकार रखे। फल और अनाज मनुष्य का भोजन है।
किन्तु जीव_हत्या बकरे की कुर्बानी देकर खाने का आदेश नहीं।
पवित्र कुरान में जीव हत्या करके मांस खाने का कहीं भी जिक्र नहीं है इसलिए यह अल्लाह के आदेश के विरुद्ध है
इसलिए अल्लाह कहते हैं -
गला काटै कलमा भरै, किया करै हलाल।
साहिब लेखा मांगसी तब होगा कौन हवाल।।
परमात्मा कबीर ने कलमा
पढ़कर जीवों की हत्या करने वाले मुल्ला काजियों को लताड़ते हुए कहा है कि जिन निर्दोष जीवों की हत्या तुम कर रहे हो इन सभी पापों का लेखा जोखा अल्लाह तुमसे जरूर लेंगे तब तुम्हे कोई बचाने वाला नही होगा।
घोर से घोर नर्क में डाला जाएगा
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